बगैर परमिट दिल्ली से प्राइवेट बसें ला रहीं जिले में कोरोना

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गौरव शुक्ला की रिपोर्ट

फर्रुखाबाद। चन्द माह पूर्व आग का गोला बनकर दर्जनों भोलेभाले लोगांे को नियम विरू( तरीके से डबल डेकर चतुर्वेदी बस ने जिन्दा जलाकर मौत के घाट उतार दिया था। वही बस सर्विस आज फिर एआरटीओ दफ्तर के रहमोकरम पर खुलेआम दिल्ली से जिले तक फर्राटा भर रही हैं। जिम्मेदार मोटी रकम डकार मौत के इन सौदागरों को मनमानी करवा रहे हैं। कोरोना संक्रमण में यह बसें जनपद में बेरोक-टोक कोरोना लेकर आ रही हैं। जिन पर कोई रोक लगाने वाला नहीं।

दिल्ली में जहां कोरोना की मार से हाहाकार मचा हुआ है वहीं ऐसे में दिल्ली से बड़ी तादात में प्रवासी घरों को भी वापस हो रहे हैं। इस दौरान जनपद के प्रशासन की मिलीभगत की बदौलत विमल चतुर्वेदी की तकरीबन चार दर्जन बसें रोजाना बिना कोविड नियमों के पालन किये जनपद में सैकड़ों की तादात में कोरोना संक्रमित लोगांे को ढोने में मशगूल हैं।

बीते दिनों कन्नौजे में हाई-वे पर चतुर्वेदी बस सर्विस की डबल डेकर बस ने दर्जनों लोगांे को जब जिन्दा फूंक दिया था तब शासन ने मामला संज्ञान लेकर बस मालिक पर कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश देते हुए जिम्मेदारों पर कार्रवाई को कहा था। वक्त गुजरा और धीरे-धीरे सरकार के आदेश पर पानी फेर दिया गया। लाल गेट व कादरी गेट स्थित चतुर्वेदी बस सर्विस का खुलेआम दफ्तर संचालित होने लगा। फर्रुखाबाद से दिल्ली और जयपुर के लिए बगैर किसी टेस्ट के लोग लाने-ले जाने शुरू हो गये। कोरोना संक्रमण काल के दौरान सरकारी बसों के लिए तो सरकार के सभी नियम हावी हैं भले ही उन नियमों के पालन से राजस्व को भारी क्षति हो रही है लेकिन एआरटीओ दफ्तर के बेईमान जिम्मेदारों की रहनुमाई के चलते चतुर्वेदी बस सर्विस के लिए कोई नियम मायने नहीं रखते।

बता दें कि लाखों के लेन-देन के बाद बस सर्विस के मालिक विमल चतुर्वेदी पर किसी ने नजर उठाने की भी जुर्रत नहीं की। रोडवेज बस स्टाॅप के निकट सरकारी बसों की सवारियों पर धड़ल्ले से डाका डालने वाले प्राइवेट बस संचालकों के आगे यहां का सिस्टम पूरी तरह नतमस्तक है।

जिलाधिकारी मानवेन्द्र सिंह ने बीते दिनांे में सिस्टम में सुधार के लिए काफी कुछ आदेश पारित किये लेकिन शाम का धुंधलका होते ही एआरटीओ दफ्तर के जिम्मेदार अपनी मनमानी पर उतारू हो जाते हैं और बस अड्डे से थोड़ी दूरी पर इन बसों में सवारियां भरते हुए देखा जा सकता है। प्राइवेट बस संचालकों का साठ-गांठ का खेल केवल एआरटीओ दफ्तर से ही नहीं बल्कि रोडवेज एआरएम से भी जुड़ा हुआ है। जिसके चलते कोई भी कार्रवाई होने की आशंका भी पूरी खत्म है।

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